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फ्लेयर राइटिंग जुटाएगा 450 करोड़ रुपये

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मुंबई- भारत में कलम और अन्य लिखने की सामग्रियों की अग्रणी निर्माता फ्लेयर राइटिंग इंडस्ट्रीज बाजार से 450 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। कंपनी ने इसके लिए पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए मसौदा जमा कराया है।

इस मसौदे के अनुसार कंपनी इस आईपीओ के जरिए 450 करोड़ रुपये जुटाएगी। इसमें से 330 करोड़ रुपये नए इक्विटी शेयरों के एवज में होगा जबकि 120 करोड़ रुपये ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए जुटाया जाएगा। कंपनी के प्रवर्तक खूबीलाल जुगराज राठोड़ ओएफएस के जरिए शेयरों को बेचकर 24 करोड़ रुपये जुटाएंगे जबकि विमलचंद गुजरात 18 करोड़ रुपये और निर्मला राठोड़, मंजुला राठोड, राजेश राठोड़, मोहित राठोड़, सुमित कुमार राठोड़ 12-12 करोड़ रुपये के शेयर बेचेंगे। संगीता राठोड़, शालिनी राठोड और सोनल राठोड अपने इक्विटी शेयर बेचकर 6 करोड़ रुपये जुटाएंगे।

कंपनी इस आईपीओ से जुटनेवाली राशि का उपयोग मशीनरी पर करेगी जिस पर 132.88 करोड़ रुपये खर्च आएगा। जबकि नए कारखाना की इमारत और इससे संबंधित सुविधाओं पर 69 करोड़ रुपये, वर्किंग कैपिटल के लिए 40.49 करोड़ रुपये और कर्जों के पुनर्भुगतान के रूप में 15 करोड़ रुपये खर्च करेगी। फ्लेयर का उत्पाद इसके मुख्य ब्रांड फ्लेयर के तहत ही बेचा जाता है जबकि अन्य ब्रांडों पियर कार्डिन, लैंडमार्क और रूडी केलनेर भी इसके उत्पादों में हैं। कंपनी जनवरी2017 से रेनॉल्ड ब्रांड की कुछ खास कलम की खास वितरक भारत में है जबकि पियर कार्डिन के तहत यह 16 उत्पादों को बेचती है।

कंपनी अपने 6 निर्माण सुविधाओं से उत्पादों का निर्माण करती है। इसमें मुंबई के पास नायगांव, दमन एवं दीव, देहरादून आदि का समावेश है। कंपनी 7 लाख इक्विटी शेयरों को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए बेच सकती है जो 50 करोड़ रुपये के बराबर होगा। इसके बुक रनिंग लीड मैनेजरों में एक्सिस कैपिटल, एडलवाइस फाईनेंशियल सर्विसेस आदि हैं।

ओयो होटल जुटाएगा 7,000 करोड़

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मुंबई- देश के हॉस्पिटैलिटी बाजार में ऑनलाइन होटल रूम बुकिंग की सुविधा देने वाला स्टार्टअप ओयो होटल चीन और दुनिया के दूसरे क्षेत्रों में पैठ बढ़ाने के लिए लगभग 7 हजार करोड़ रु जुटाने जा रहा है। कंपनी ने मंगलवार को कहा कि उसके सॉफ्टबैंक विजन फंड, सिक्वोया कैपिटल लाइस्पीड्स वेंचर पार्टनर्स सहित उसके मौजूदा निवेशकों ने 80 करोड़ डॉलर, जबकि अन्य ने 20 करोड़ डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जाहिर की है।

ओयो इस फंड में से 60 करोड़ डॉलर चीन में निवेश करेगी, जहां कंपनी ने महज 10 महीने पहले ही ऑपरेशन शुरू किया है। घटनाक्रम की जानाकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि इस निवेश के साथ कंपनी की फंडिंग वैल्यू 5 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। ओयो की स्थापना एक 24 वर्षीय कॉलेज ड्रॉपआउट ने लगभग 5 साल तक भारत भर में घूमने के बाद की थी। बीते दो साल के दौरान कंपनी ने भारत से बाहर निकलकर चीन, मलेशिया, नेपाल और ब्रिटेन में भी अपना विस्तार किया है।

इस अतिरिक्त फंडिंग के साथ इन देशों में अपनी पैठ बढ़ाने की योजना है, वहीं कपनी टेक्नोलॉजी और टैलेंट में भी निवेश करती रहेगी। हम अपने यूनीक मॉडल में भी नई पूंजी लगाएंगे, जिसके माध्यम से कंपनी छोटे होटल मालिकों को गुणवत्तापूर्ण लिविंग स्पेस तैयार करने में मदद करती है।’ कंपनी उन होटलों को अपनी होटल वेबसाइट से जोड़ती है, जहां कमरों के किराए प्रति रात 1750 रुपए से शुरू होते हैं। होटल मालिक को 25 फीसदी कमीशन देते हैं।

एनबीएफसी के शेयरों में 50 फीसदी की गिरावट, मिलेगा बेहतर रिटर्न

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मुंबई- एनबीएफसी के शेयरों में मचे कोहराम के चलते इस महीने में इनके शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है। हालात यह है कि 50 फीसदी तक इनके शेयर गिर चुके हैं, जिसकी वजह से निवेशकों को भारी नुकसान हो रहा है।

आंकड़ों से पता चलता है कि एनबीएफसी के करीबन 60 शेयरों में गिरावट दिखी है औऱ् इसमें से कुछ तो 50 फीसदी तक गिर चुके हैं। इसमें दीवान हाउसिंग फाईनेंस 47 फीसदी गिरा है तो रिलायंस कैपिटल 28 फीसदी गिरा और बजाज फाईनेंस 16 फीसदी गिरा है। हाल में डेट मार्केट लिक्विडिटी में गिरावट ने मजबूत एनबीएफसी को फिर से समीक्षा करने के लिए विश्लेषकों को मजबूर कर दिया है।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक हमें निकट भविष्य में एनबीएफसी में किसी तरीके का जोखिम नहीं दिख रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक अच्छी तरह से संचालित एनबीएफसी कंपनियों के व्यवसाय मॉडल काफी अच्छे हैं और यह सभी चक्रों में अच्छा काम करती हैं जिसमें रिटेल सेगमेंट खासकर फोकस करता है। जिन एनबीएफसी पर कोटक का फोकस है उसमें एलआईसी हाउसिंग फाईनेंस, पीएफसी और आरईसी आदि का समावेश है।

एचडीएफसी की बात करें तो इसे विश्लेषकों ने 2,020 रुपये के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है जो यहां से 10 फीसदी ऊपर जा सकता है। यह बांड बाजार में बड़ी कंपनी है जो 54 फीसदी उधारी एनसीडी और सीपी से लेती है। इसी तरह एलआईसी हाउसिंग में 32 फीसदी के रिटर्न की उम्मीद है और इसे 580 रुपये के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी गई है, जो अभी 438 रुपये पर कारोबार कर रहा है। एलएंडटी फाईनेंस में जहां 17 फीसदी लाभ मिलने की उम्मीद है वहीं मैग्मा फिनकॉर्प में 31 फीसदी रिटर्न की उम्मीद है।

बैंकों के बाबुओं की कमाई होगी बंद

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मुंबई- सरकारी बैंक बाबुओं के लिए अच्छी खबर नहीं है। जल्द ही उनकी वह ऊपरी कमाई बंद हो जाएगी जो उनके वेतन के अलावा होती थी। क्योंकि सरकार का मानना है कि क्रॉस सेलिंग उत्पादों पर बैंक बाबुओं को मिलने वाले कमीशन बंद कर देना चाहिए। इस संबंध में सरकार की तरफ से सभी बैंकों के प्रमुख को पत्र भेज दिया गया है। इस कमीशन को सरकार बैंक के खाते में डालना चाहती है ताकि बैंक की आय बढ़े।

बता दें कि क्रॉस सेलिंग उत्पादों में बीमा और म्युच्युल फंड जैसे उत्पाद शामिल होते हैं जिसे सरकारी बैंक के बाबू इन दिनों धड़ल्ले से बेच रहे हैं। बकायदा उन्हें क्रॉस सेलिंग उत्पाद का लक्ष्य दिया जाता है। बैंक यूनियन की तरफ से क्रास सेलिंग उत्पादों को लेकर कई बार सरकार से शिकायत की जा चुकी है। यूनियन का कहना है कि बैंक बाबुओं को कर्ज देने और लोन की रिकवरी जैसे काम पर फोकस करना चाहिए, लेकिन वे अपना फोकस क्रास सेलिंग उत्पादों पर रखते हैं।

बैंक प्रमुखों को वित्त मंत्रालय की तरफ से भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि बैंक के कर्मचारी पूर्णकालिक कर्मचारी हैं और उन्हें इसके बदले निर्धारित वेतन दिया जाता है। इसलिए उन्हें अलग से कमीशन देने की जरूरत नहीं है। इस कमीशन को बैंक के खाते में डाला जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा है कि ऐसा देखा गया है कि कई बार क्रॉस सेलिंग उत्पाद के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बैंककर्मी अपने मूल काम को अनदेखी करते हैं।

बैंक बाबुओं का कहना है कि इससे बैंक को फीस के रूप में होने वाली आय का नुकसान हो सकता है। निजी बैंक अपने कर्मचारी को थर्ड पार्टी उत्पाद बेचने के बदले काफी शुल्क देते है, इससे उनके व्यवसाय में बढ़ोतरी होगी। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने गत वित्त वर्ष में फीस से अपनी आय में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। गत्त वित्त वर्ष में क्रास सेलिंग उत्पादों से स्टेट बैंक ने 1631 करोड़ रुपये की कमाई की।

आईएलएंडएफएस की मुश्किलें होंगी कम

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मुंबई- नकदी की किल्लत से जूझ रही आईएलएंडएफएस की मुश्किलें कुछ हल हो सकती हैं। इसके सबसे बड़े शेयरधारक एलआईसी के चेयरमैन का कहना है कि कंपनी के बेल-आउट की हर कोशिश की जाएगी। एलआईसी चेयरमैन ने कहा है कि आईएलएंडएफएस को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे हालांकि कंपनी में हिस्सा बढ़ाने पर अभी फैसला नहीं होगा।

बता दें कि आईएलएंडएफएस में एलआईसी की 25.34 फीसदी हिस्सेदारी है। इधर आईएलएंडएफएस ने कहा है कि ज्यादातर शेयरधारक 4,500 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू में निवेश के लिए तैयार हैं। सूत्रों के मुताबिक आईएलएंडएफएस में बड़ा निवेश रखनी वाले एचडीएफसी ने कंपनी के राइट्स इश्यू में हिस्सा नहीं लेने की बात कही है। साथ ही एचडीएफसी ने साफ किया है कि कंपनी ने आईएलएंडएफएस के बोर्ड में जगह की मांग नहीं की। हालांकि एचडीएफसी का मानना है कि आईएलएंडएफएस के पास अच्छे एसेट्स मौजूद हैं। आईएलएंडएफएस में एचडीएफसी की 9.02 फीसदी हिस्सेदारी है।

आईएलएंडएफएस की 17 हजार करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान के लिए 25 संपत्तियों को बेचने की योजना है। कंपनी इस महीने में अब तक 3 कमर्शियल पेपर पर डिफॉल्ट कर चुकी है। ग्रुप का कहना है कि निवेशकों ने 25 में से 14 एसेट्स में निवेश की इच्छा जताई है। कंपनी का कहना है कि 25 एसेट्स बेचने से 35 हजार करोड़ रुपये का कर्ज घटेगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली और भारतीय रिजर्व बैंक के उप गवनर्र विरल आचार्य आईएलएंडएफएस डिफॉल्ट के असर पर चर्चा करे सकते हैं। आईएलएंडएफएस में एनबीएफसी के एक्सपोजर पर भी चर्चा संभव है।

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